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सृष्टि मेडिकल स्टोर मामले में जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग

 


सृष्टि मेडिकल स्टोर मामले में जांच प्रक्रिया पर उठे सवाल, स्वतंत्र जांच की मांग

मुंगेली/बदरा। ग्राम पंचायत बदरा स्थित सृष्टि मेडिकल स्टोर से संबंधित शिकायत की जांच प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। शिकायतकर्ता की ओर से अधिकारियों को दिए गए आवेदन में पूर्व एवं वर्तमान जांच अधिकारियों की भूमिका, शिकायत वापस लेने के कथित दबाव, समझौते के लिए प्रलोभन तथा जांच को प्रभावित किए जाने की आशंका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

शिकायत में कहा गया है कि इस मामले में पूर्व में जांच अधिकारी श्रीमती किरण सिंह द्वारा जांच की गई थी। बाद में निष्पक्षता और पारदर्शिता के उद्देश्य से मुंगेली जिले से बाहर के अधिकारी से जांच कराए जाने की जानकारी सामने आई तथा श्रीमती सुमन कंवर, बिलासपुर को वर्तमान जांच अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया।

शिकायतकर्ता के अनुसार, जांच के दौरान एक दिन पूर्व जांच अधिकारी किरण सिंह अपने दल-बल एवं कुछ पत्रकारों के साथ शिकायतकर्ता श्री राजेश यादव के घर पहुंचीं। आरोप है कि वहां शिकायत वापस लेने अथवा मामले में पीछे हटने के लिए दबाव बनाने का प्रयास किया गया। शिकायत में यह भी उल्लेख है कि इसी दौरान वर्तमान जांच अधिकारी श्रीमती सुमन कंवर को भी शिकायतकर्ता के घर बुलाया गया था। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

शिकायतकर्ता पर लगातार दबाव का आरोप

आवेदन में आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ता पर लगातार दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है। शिकायतकर्ता को तलाशने के लिए बिलासपुर सहित अन्य स्थानों पर लोगों को भेजे जाने तथा उसकी लोकेशन की जानकारी लेने के प्रयास का भी दावा किया गया है। शिकायतकर्ता के अनुसार, इससे उसके और उसके परिवार में भय एवं चिंता की स्थिति बनी हुई है।

कई लोगों के माध्यम से समझौते का कथित प्रयास

शिकायत में कुछ व्यक्तियों के नामों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके माध्यम से शिकायतकर्ता पर समझौता करने अथवा शिकायत वापस लेने के लिए दबाव और कथित रूप से प्रलोभन/धन की पेशकश का प्रयास किया गया। शिकायतकर्ता ने स्पष्ट किया है कि वह बिना जांच किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहरा रहा है, बल्कि सभी आरोपों की स्वतंत्र जांच चाहता है।

पूर्व जांच की भी समीक्षा की मांग

शिकायतकर्ता ने सृष्टि मेडिकल स्टोर की पूर्व जांच की संपूर्ण प्रक्रिया की स्वतंत्र समीक्षा की मांग की है। इसमें जांच के दौरान लिए गए दस्तावेज, बयान, निरीक्षण रिपोर्ट, पंचनामा, मेडिकल स्टोर का लाइसेंस, लोकेशन, पुनः संचालन की अनुमति तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच शामिल है।

साथ ही यह भी जांचने की मांग की गई है कि पूर्व जांच अधिकारी द्वारा शिकायतकर्ता अथवा अन्य संबंधित लोगों से शिकायत वापस लेने, समझौता करने या किसी प्रकार का दबाव बनाने के लिए संपर्क किया गया था या नहीं।

वर्तमान जांच अधिकारी की भूमिका की भी जांच की मांग

शिकायत में वर्तमान जांच अधिकारी श्रीमती सुमन कंवर की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की गई है। आवेदन में यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया गया है कि शिकायतकर्ता के घर पर कौन-कौन लोग पहुंचे, किसके कहने पर पहुंचे, वहां क्या बातचीत हुई और शिकायत वापस लेने अथवा समझौते के लिए कोई दबाव या प्रलोभन दिया गया या नहीं।

यदि शिकायतकर्ता के घर पर दबाव बनाए जाने की घटना हुई थी, तो उस दौरान वर्तमान जांच अधिकारी को किसने बुलाया और उन्होंने कथित दबाव के संबंध में क्या कार्रवाई की, इसकी भी जांच की मांग की गई है।

इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य सुरक्षित कराने की मांग

शिकायतकर्ता ने मामले से जुड़े संभावित कॉल रिकॉर्ड, उपलब्ध कॉल रिकॉर्डिंग, मोबाइल एवं व्हाट्सऐप संदेश, सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल लेनदेन और बैंक संबंधी रिकॉर्ड सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को नियमानुसार सुरक्षित कर जांच में शामिल करने की मांग की है। साथ ही शिकायतकर्ता एवं उसके परिवार के सदस्यों के बयान स्वतंत्र अधिकारी के समक्ष दर्ज कराने का अनुरोध किया गया है।

जिले से बाहर के वरिष्ठ अधिकारी से जांच की मांग

शिकायतकर्ता ने वर्तमान जांच अधिकारी एवं पूर्व जांच अधिकारी से अलग किसी वरिष्ठ एवं स्वतंत्र अधिकारी, अधिमानतः मुंगेली जिले से बाहर के सक्षम अधिकारी या अधिकारी दल से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

आवेदन में सृष्टि मेडिकल स्टोर की मूल शिकायत से लेकर वर्तमान समय तक की पूरी कार्रवाई की फाइल की समीक्षा, संबंधित दस्तावेजों की जांच, शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, मेडिकल संचालक या अन्य व्यक्ति की भूमिका दोषपूर्ण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता ने कहा है कि आवेदन का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता, पारदर्शिता और शिकायतकर्ता की सुरक्षा सुनिश्चित कराना है। अब देखना होगा कि संबंधित प्रशासन इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर क्या निष्कर्ष निकलता है।

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