CMHO बिलासपुर ने शासन को दिया झूठा प्रमाण पत्र? संलग्नीकरण खत्म करने के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति
विधानसभा में मंत्री के आश्वासन क्रमांक 371 की उड़ रही धज्जियां, बिलासपुर CMHO की रिपोर्ट पर उठे गंभीर सवाल
बिलासपुर में संलग्नीकरण समाप्ति सिर्फ कागजों में, बिल्हा-कोटा-मस्तूरी-तखतपुर के आदेश आज भी गायब, एयरपोर्ट पर RMA की तैनाती पर भी सवाल
*बिलासपुर।* छत्तीसगढ़ विधानसभा में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा दिए गए *आश्वासन क्रमांक 371* में प्रदेश भर में स्वास्थ्य विभाग के सभी संलग्नीकरण समाप्त करने की घोषणा के बाद भी बिलासपुर जिले में इस आदेश का पालन कागजों तक ही सीमित रहने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) बिलासपुर ने शासन और संचालनालय की आंखों में धूल झोंकते हुए बिना वास्तविक कार्रवाई के ही संलग्नीकरण समाप्ति का प्रमाण पत्र भेज दिया।
पहले एक पन्ने का प्रमाण पत्र, फिर फंसे तो अधूरी रिपोर्ट
मामले की शुरुआत 12 मार्च 2026 से होती है। संचालक स्वास्थ्य सेवाएं, रायपुर ने अपने पत्र क्रमांक *संचा/पीए/2026/30 दिनांक 12.03.2026* के तहत सभी जिलों से संलग्नीकरण समाप्त कर प्रमाण पत्र मांगा था। आरोप है कि CMHO बिलासपुर और उनके अधीनस्थ खंड चिकित्सा अधिकारियों ने ब्लॉकवार वास्तविक सूची तैयार करने के बजाय आनन-फानन में एक पन्ने का प्रमाण पत्र भेजकर इतिश्री कर ली।
शासन को इस प्रमाण पत्र पर संदेह हुआ तो संचालक ने दोबारा पत्र क्रमांक *PLGM/2402/2026/DHS/VS, नवा रायपुर, दिनांक 09.10.2026* जारी कर 7 बिंदुओं के निर्धारित प्रारूप में विस्तृत जानकारी मांगी। जिसमें -
1. कर्मचारी का नाम, 2. पदनाम, 3. मूल पदस्थापना, 4. संलग्न पदस्थापना, 5. संलग्नीकरण प्रारंभ तिथि, 6. समाप्ति तिथि, 7. समाप्त न करने का कारण, स्पष्ट करना था।
*लेकिन CMHO कार्यालय से जो रिपोर्ट भेजी गई, उसमें सिर्फ 24 कर्मचारियों के नाम दिखाए गए और अधिकांश कॉलम खाली या निरंक बताकर शासन को गुमराह करने का प्रयास किया गया।* संलग्नीकरण कब से शुरू हुआ, क्यों नहीं हटाया, इसका कोई जवाब नहीं दिया गया।
*चारों ब्लॉकों का खेल छिपाया गया*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि CMHO ने अपनी रिपोर्ट में केवल अपने कार्यालय के संलग्नीकरण की अधूरी जानकारी दी, जबकि *बिल्हा, कोटा, मस्तूरी और तखतपुर* के BMO स्तर पर किए गए सैकड़ों संलग्नीकरण की जानकारी आज तक संचालनालय को नहीं भेजी गई। यदि संलग्नीकरण समाप्त हो गए तो कर्मचारी मूल पद पर कब ज्वाइन किए? यदि नहीं हुए तो क्यों नहीं हुए, यह कारण क्यों छिपाया गया?
उपस्थिति, वेतन और इंक्रीमेंट किस आदेश से?
यदि कर्मचारी बिना वैध संलग्नीकरण आदेश के वर्षों से दूसरी जगह काम कर रहे थे तो -
- उनकी हाजिरी किस आदेश से भरी गई?
- वेतन किस बजट से निकला?
- सालाना इंक्रीमेंट किसने दिया?
- उनकी CR किस अधिकारी ने लिखी?
ये पांच सवाल सीधे तौर पर वित्तीय अनियमितता और सेवा नियमों के उल्लंघन की ओर इशारा करते हैं।
बिलासपुर एयरपोर्ट पर RMA को डॉक्टर बनाकर तैनाती?
इस पूरे खेल में सबसे संवेदनशील मामला बिलासपुर एयरपोर्ट का है। आरोप है कि एयरपोर्ट पर एक *RMA (ग्रामीण चिकित्सा सहायक)* को संलग्न कर तैनात किया गया है, लेकिन उसका नाम CMHO द्वारा भेजी गई 24 लोगों की सूची में शामिल ही नहीं है।
सवाल उठता है कि RMA को क्या डॉक्टर के रूप में दिखाकर तैनात किया गया है? RMA और MBBS डॉक्टर की कानूनी कार्यसीमा अलग-अलग है। एयरपोर्ट जैसे संवेदनशील स्थान पर जहां आपात स्थिति में यात्रियों की जान बचानी होती है, वहां अयोग्य व्यक्ति की तैनाती यात्रियों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं तो क्या है?
*जांच की मांग*
अब मांग उठ रही है कि विधानसभा के आश्वासन के पालन की निष्पक्ष जांच हो, CMHO और चारों BMO के संलग्नीकरण आदेश, उपस्थिति पंजी, वेतन देयक और एयरपोर्ट तैनाती के रिकॉर्ड को जब्त कर मिलान किया जाए। यदि झूठा प्रमाण पत्र देकर शासन को गुमराह करने की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।

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