बिलासपुर/रायपुर (छत्तीसगढ़)
छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में इन दिनों यातायात व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बिलासपुर-रायपुर मुख्य मार्ग पर यातायात पुलिस द्वारा चलाए जा रहे हेलमेट चेकिंग अभियान पर अब “अवैध वसूली” के आरोप लगने लगे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई एक-दो दिन की कार्रवाई नहीं, बल्कि सालभर चलने वाला एक “स्थायी खेल” बन चुका है।
किसानों और मजदूरों पर सबसे ज्यादा दबाव
बताया जा रहा है कि इस मार्ग से रोजाना गुजरने वाले किसान, मजदूर और कम पढ़े-लिखे लोग पुलिस की इस कार्रवाई का सबसे ज्यादा शिकार बन रहे हैं। उन्हें रोक-रोककर न सिर्फ परेशान किया जाता है, बल्कि कथित तौर पर “सेटलमेंट” के नाम पर पैसे भी वसूले जाते हैं।
इमरजेंसी वालों को भी नहीं मिलती राहत
सबसे चिंताजनक बात यह सामने आई है कि इमरजेंसी में जा रहे लोगों को भी नहीं छोड़ा जाता।
निवेदन करने के बावजूद उन्हें रोका जाता है और कथित रूप से कठोर व्यवहार किया जाता है।
बिना अनुमति चेकिंग पॉइंट
स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि:
क्या साल के लगभग 365 दिन चेकिंग के लिए अनुमति होती है?
क्या हर दिन चेकिंग पॉइंट लगाना नियमों के तहत सही है?
लोगों का आरोप है कि कई जगहों पर बिना वैध अनुमति के चेकिंग पॉइंट लगाए जाते हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
पत्रकारों से भी बदसलूकी के आरोप
मामला और गंभीर तब हो जाता है जब पत्रकारों के साथ भी कथित दुर्व्यवहार की बातें सामने आती हैं।
सूत्रों के अनुसार, जानकारी मांगने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं दिया जाता और अभद्र व्यवहार किया जाता है।
चालान कम, “सेटलमेंट” ज्यादा
लोगों का आरोप है कि:
वास्तविक चालान कम काटे जाते हैं
और “सेटलमेंट” के जरिए मौके पर ही पैसे लेकर मामला खत्म कर दिया जाता है
जिससे सरकारी राजस्व को भी नुकसान और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है।
जनता ने उठाई जांच की मांग
अब स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
लोग चाहते हैं कि:
चेकिंग की पारदर्शी व्यवस्था हो
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई हो
आम जनता को अनावश्यक परेशान न किया जाए
बड़ा सवाल
क्या हेलमेट चेकिंग के नाम पर वाकई नियमों का पालन हो रहा है,
या फिर यह सिर्फ “वसूली का जरिया” बन चुका है?

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