लोकेशन – तिल्दा नेवरा
रिपोर्टर – अशोक मिश्रा
तिल्दा-नेवरा से लगी ग्राम पंचायत बहेसर में मंगलवार को एक ऐसा भावुक और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जिसने समाज के सामने नई सोच और बदलती परंपराओं की मिसाल पेश की। यहां पिता के निधन के बाद उनकी छह वर्षीय मासूम बेटी ने अंतिम संस्कार की रस्म निभाते हुए अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस मार्मिक दृश्य ने उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम कर दीं।
जानकारी के अनुसार ग्राम बहेसर निवासी नितेश वर्मा (31 वर्ष) का मंगलवार को आकस्मिक निधन हो गया। नितेश वर्मा के असमय निधन से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। अंतिम संस्कार के दौरान जब मुखाग्नि देने का समय आया, तब उनकी छह वर्षीय बेटी आशीका वर्मा ने आगे बढ़कर अपने पिता को मुखाग्नि दी।
छोटी सी उम्र में आशीका द्वारा निभाई गई यह अंतिम जिम्मेदारी न केवल भावुक कर देने वाली थी, बल्कि समाज को एक गहरा संदेश भी दे गई। आमतौर पर अंतिम संस्कार की परंपराओं में पुत्र को मुखाग्नि देने का अधिकार माना जाता रहा है, लेकिन बहैसर में इस मासूम बेटी ने यह साबित कर दिया कि बेटियां भी हर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। बेटियां केवल परिवार का मान-सम्मान ही नहीं, बल्कि कठिन से कठिन परंपराओं को निभाने का साहस भी रखती हैं।
श्मशान घाट में मौजूद ग्रामीणों और परिजनों ने इस दृश्य को भावुक मन से देखा। कई लोगों ने इसे समाज के लिए प्रेरणादायक कदम बताया। ग्रामीणों का कहना था कि यह दृश्य केवल एक अंतिम संस्कार नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान, अधिकार और समानता का जीवंत संदेश है।
बहेसर की इस घटना ने यह सिद्ध कर दिया कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं हैं। आशीका वर्मा ने अपनी मासूम उम्र में वह साहस दिखाया, जो समाज के लिए एक नई मिसाल बन गया। यह दृश्य लंबे समय तक लोगों के मन में एक प्रेरक संदेश के रूप में याद रखा जाएगा।
Post a Comment