“खरीदी हो गई, लेकिन भुगतान नहीं… आखिर किसान कब तक रहेगा परेशान?”
मुंगेली
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संचालित तिलहन-दलहन खरीदी योजना के अंतर्गत किसानों से चना, मसूर एवं अन्य फसलों की खरीदी तो कर ली गई, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी किसानों को उनकी उपज का भुगतान नहीं मिल पाया है। भुगतान की आस में किसान रोज समिति और विभागीय कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
किसानों का आरोप है कि संबंधित विभाग और सेवा सहकारी समिति के अधिकारी-कर्मचारी रोजाना अलग-अलग बहाने बनाकर केवल आश्वासन दे रहे हैं। कोई अधिकारी कहता है कि “चना का उठाव नहीं हुआ है”, तो कोई “गलत एंट्री” का हवाला देकर भुगतान रोकने की बात कह रहा है। लगातार टालमटोल से किसानों में भारी नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों का कहना है कि खेती-किसानी ही उनका मुख्य सहारा है। कर्ज लेकर बोवाई करने वाले किसान अब आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं। खाद, बीज, बच्चों की पढ़ाई और घरेलू खर्च तक प्रभावित हो रहे हैं। किसानों का दर्द है कि सरकार कोई भी हो, सबसे ज्यादा परेशानी हमेशा किसान को ही उठानी पड़ती है।
किसानों ने आरोप लगाया कि खरीदी के समय बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन भुगतान के समय अधिकारी जिम्मेदारी से बचते नजर आते हैं। कई किसानों का कहना है कि यदि समय पर भुगतान नहीं मिला तो आगामी खेती कार्य प्रभावित हो सकता है।
किसानों ने उठाए सवाल
खरीदी के बाद भी भुगतान में देरी क्यों?
गलत एंट्री होने पर जिम्मेदार कौन?
किसानों को बार-बार कार्यालयों के चक्कर क्यों लगवाए जा रहे?
आखिर अन्नदाता को ही हर बार परेशानी क्यों झेलनी पड़ती है?
किसानों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हो, ताकि किसानों को राहत मिल सके।


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