खाद-बीज संकट से जूझ रहा अन्नदाता, समितियों की मनमानी से किसानों में भारी आक्रोश
“जिस किसान के भरोसे देश चलता है, वही आज सबसे ज्यादा परेशान”
देश की अर्थव्यवस्था और हर घर की रसोई का आधार किसान है। खेतों में दिन-रात मेहनत कर अन्न उगाने वाला किसान आज खुद खाद और बीज के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हो रहा है। एक तरफ खेती का मौसम शुरू होने वाला है, वहीं दूसरी तरफ सेवा सहकारी समितियों में खाद-बीज की कमी और वितरण में कथित मनमानी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है।
ग्रामीण क्षेत्रों से लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं कि किसानों को उनकी आवश्यकता अनुसार खाद नहीं दिया जा रहा है। कई किसानों का आरोप है कि समितियों के प्रबंधक शासन के आदेश का हवाला देकर सीमित मात्रा में खाद वितरण कर रहे हैं, जबकि खेती के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध होना बेहद जरूरी है। किसान घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।
किसानों का कहना है कि जब देश के प्रधानमंत्री स्वयं किसानों की आय बढ़ाने और कृषि को मजबूत करने की बात करते हैं, तब जमीनी स्तर पर समितियों की मनमानी किसानों की परेशानी बढ़ा रही है। किसान पूछ रहे हैं कि यदि खेती के लिए जरूरी खाद और बीज ही समय पर नहीं मिलेगा, तो खेतों में उत्पादन कैसे होगा? आखिर देश की खाद्य व्यवस्था कैसे चलेगी?
ग्रामीणों का कहना है कि “पैसा खाकर जीवन नहीं चल सकता, पेट भरने के लिए अन्न चाहिए और अन्न केवल किसान ही उगाता है।” इसके बावजूद सबसे ज्यादा उपेक्षा किसानों की ही हो रही है। खेती प्रभावित होने का सीधा असर आम जनता तक पहुंचेगा और आने वाले समय में खाद्यान्न संकट जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है।
कई किसानों ने प्रशासन और सरकार से मांग की है कि सेवा सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली की जांच कर किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद-बीज उपलब्ध कराया जाए। साथ ही कालाबाजारी और भेदभावपूर्ण वितरण पर सख्त कार्रवाई की जाए।
किसानों की चेतावनी
यदि समय रहते खाद-बीज की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो किसान सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होंगे। किसानों का साफ कहना है कि “अन्नदाता परेशान होगा तो देश भी परेशान होगा।”
Post a Comment