जिला सहकारी केंद्रीय मर्यादित बैंक की पथरिया और सरगांव शाखाओं में जो हो रहा है, वह सिर्फ लापरवाही नहीं बल्कि किसानों के हक पर खुली लूट जैसा नजर आ रहा है।
“अपना पैसा, फिर भी लाइन में सज़ा!”
किसान सुबह से बैंक के बाहर लाइन में खड़े रहते हैं — घंटों इंतजार, धक्का-मुक्की और अपमान झेलने के बाद भी शाम तक उन्हें पैसा नहीं मिलता।
स्थिति इतनी बदतर है कि लोग इसे जेल जैसी व्यवस्था बता रहे हैं।
“कमीशन दो, सुविधा लो” – खुला खेल!
सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आ रही है कि:
👉 जो किसान “1 लाख पर 1 हजार” कमीशन देने को तैयार हैं
👉 उनका पैसा सीधे घर, दुकान या होटल तक पहुंचाया जा रहा है
यानी साफ है —
बिना पैसे दिए आपका काम नहीं, और पैसे दिए तो VIP सुविधा!
बैंक के अंदर ही खेल
स्थानीय लोगों और किसानों का सीधा आरोप है कि यह पूरा खेल बैंक के कर्मचारियों की मिलीभगत से चल रहा है।
बिना अंदरूनी सहयोग के इस तरह की व्यवस्था संभव ही नहीं मानी जा रही।
किसानों का फूटा गुस्सा
किसानों का कहना है:
“हमारी मेहनत की कमाई है, फिर भी हमें भीख मांगने जैसा व्यवहार झेलना पड़ रहा है… और जो पैसे दे रहा है, उसे घर बैठे सुविधा मिल रही है!”
📢 अब सवाल प्रशासन से
क्या बैंक अब सेवा केंद्र नहीं, दलाली केंद्र बन गया है?
क्या गरीब किसान लाइन में सड़े और पैसे वाले VIP बनें?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों की नजर इस पर नहीं पड़ रही?
मांग – तुरंत कार्रवाई!
किसानों और क्षेत्रवासियों ने मांग की है:
✔ पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच हो
✔ दोषी कर्मचारियों को तत्काल निलंबित किया जाए
✔ बैंक में पारदर्शी व्यवस्था लागू की जाए
👉 अगर ये आरोप सच हैं, तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं… बल्कि किसानों के आत्मसम्मान पर सीधा हमला है। अब देखना है — प्रशासन कार्रवाई करता है या यह “वसूली सिस्टम” ऐसे ही चलता रहेगा!
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