चिन्हारी योजना से सशक्त हो रही छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति
रायपुर- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित एवं प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संचालित “चिन्हारी योजना” अब प्रदेश की लोक संस्कृति को नई पहचान दिला रही है। इस योजना के माध्यम से पारंपरिक कला, लोकनृत्य, लोकगीत और ग्रामीण कलाकारों को मंच एवं आर्थिक सहयोग मिल रहा है।
राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत विभिन्न जिलों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिससे नई पीढ़ी भी अपनी परंपराओं से जुड़ रही है। लोक कलाकारों को न केवल अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिल रहा है, बल्कि उन्हें सम्मान और रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हो रहे हैं।
🎶 लोक कलाकारों को मिल रहा बढ़ावा
चिन्हारी योजना के तहत पंथी, राउत नाचा, करमा, ददरिया जैसे पारंपरिक लोकनृत्यों और गीतों को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रामीण अंचलों के कलाकारों को पहचान दिलाने के साथ-साथ उनकी कला को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
📈 संस्कृति के साथ रोजगार का भी सृजन
इस योजना से जुड़े कलाकारों को मानदेय, प्रशिक्षण और विभिन्न मंचों पर प्रस्तुति के अवसर मिल रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति भी मजबूत हो रही है। इससे लोक संस्कृति के संरक्षण के साथ-साथ रोजगार के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।
📢 सरकार का उद्देश्य
राज्य सरकार का उद्देश्य छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को सहेजते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना और वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है।
👉 चिन्हारी योजना बन रही है छत्तीसगढ़ की संस्कृति और कलाकारों के सशक्तिकरण का मजबूत माध्यम।

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