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सुपोषण की ओर बढ़ते कदम: मुंगेली में बच्चों को मिल रही नई जिंदगी


सुपोषण की ओर बढ़ते कदम: मुंगेली में बच्चों को मिल रही नई जिंदगी

मुंगेली 25 अप्रैल 2026//. जिले के 100 बिस्तरीय जिला चिकित्सालय में संचालित पोषण पुनर्वास केंद्र आज कुपोषित बच्चों के लिए नई जिंदगी का आधार बनता जा रहा है। लगभग 15 वर्षों से निरंतर कार्यरत इस केंद्र ने अब तक हजारों बच्चों को कुपोषण के दुष्चक्र से बाहर निकालकर स्वस्थ जीवन की ओर अग्रसर किया है। जिला चिकित्सालय  में संचालित 10 बिस्तरीय पोषण पुनर्वास केंद्र में अब तक करीब 2000 से अधिक बच्चों का उपचार किया जा चुका है। इनमें से लगभग 1800 बच्चों को कुपोषण की श्रेणी से निकालकर सुपोषित बनाया गया है। 

    मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ शीला साहा ने बताया कि अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक कुल 219 बच्चों को भर्ती किया गया, जिनमें से 182 बच्चे उपचार के बाद सुपोषित श्रेणी में आ चुके हैं। यह उपलब्धि न केवल स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता को दर्शाती है, बल्कि समाज में जागरूकता बढ़ने का भी संकेत है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संचालित इस केंद्र का मुख्य उद्देश्य गंभीर कुपोषण से जूझ रहे बच्चों को समुचित उपचार, संतुलित आहार और नियमित निगरानी के माध्यम से स्वस्थ बनाना है। यहां 01 माह से 05 वर्ष तक के बच्चों को भर्ती कर निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत इलाज और पोषण आहार दिया जाता है। इसके साथ ही बच्चों के अभिभावकों को भी पोषण संबंधी जानकारी और व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, ताकि वे घर पर भी बच्चों की सही देखभाल कर सकें।

    डीपीएम श्री गिरीश कुर्रे ने बताया कि पोषण पुनर्वास केंद्र की विशेषता यह है कि यहां उपचार के साथ-साथ बच्चों के समग्र विकास पर भी ध्यान दिया जाता है। माताओं को स्तनपान, पूरक आहार, स्वच्छता और बाल देखभाल से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी जाती है। इसके अलावा, केंद्र में समय-समय पर राष्ट्रीय कार्यक्रमों जैसे पोषण पखवाड़ा, स्तनपान सप्ताह, शिशु संरक्षण दिवस आदि का आयोजन कर जागरूकता बढ़ाई जाती है। जिले में वर्तमान में तीन पोषण पुनर्वास केंद्र संचालित हैं, जिनमें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लोरमी में 08 बिस्तर तथा जिला अस्पताल में 10 बिस्तरों की सुविधा उपलब्ध है। यहां प्रशिक्षित डॉक्टरों, नर्सों और पोषण विशेषज्ञों की टीम बच्चों की निरंतर निगरानी और देखभाल में जुटी रहती है। भर्ती बच्चों का नियमित फॉलोअप भी किया जाता है, जिससे उनकी प्रगति पर नजर रखी जा सके।

    इस पूरी प्रक्रिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मितानिनों और आरबीएसके टीम की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, जो कुपोषित बच्चों की पहचान कर उन्हें केंद्र तक पहुंचाने का कार्य करती हैं। यही समन्वित प्रयास इस अभियान को सफल बना रहा है। कुपोषण के खिलाफ यह लड़ाई केवल स्वास्थ्य विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। मुंगेली का पोषण पुनर्वास केंद्र इस दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है कि सही रणनीति, समर्पण और सामूहिक प्रयास से कुपोषण जैसी गंभीर समस्या पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।


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