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दुर्ग संभाग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमीनार का सफल आयोजन, 92 न्यायिक अधिकारियों ने की सहभागिता


 दुर्ग संभाग में एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमीनार का सफल आयोजन, 92 न्यायिक अधिकारियों ने की सहभागिता

बेमेतरा 11 अप्रैल 2026:- छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा जिला न्यायालय, दुर्ग में दुर्ग संभाग के न्यायिक अधिकारियों हेतु एक दिवसीय संभागीय न्यायिक सेमीनार का आयोजन किया गया। इस सेमीनार में दुर्ग संभाग के पाँच सिविल जिलों से कुल 92 न्यायिक अधिकारियों ने सहभागिता की।


कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा, मुख्य न्यायाधिपति, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय एवं मुख्य संरक्षक, छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। इस अवसर पर न्यायमूर्ति रजनी दुबे तथा न्यायमूर्ति रवीन्द्र कुमार अग्रवाल की गरिमामयी उपस्थिति रही। मुख्य न्यायाधिपति ने नवीन अधिनियमित आपराधिक कानूनों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये कानून आपराधिक न्याय प्रणाली के आधुनिकीकरण की दिशा में एक परिवर्तनकारी कदम हैं, जिनमें तकनीकी प्रगति का समावेश कर अधिक प्रभावी एवं पीड़ित-केंद्रित दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने न्यायिक अधिकारियों को इन अधिनियमों की स्पष्ट एवं व्यावहारिक समझ विकसित करने पर बल दिया।


उन्होंने परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 138 से संबंधित मामलों में शीघ्र निराकरण हेतु नवाचारी प्रकरण प्रबंधन तकनीकों को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के बढ़ते महत्व पर चर्चा करते हुए भारतीय साक्ष्य अधिनियम के अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की ग्राह्यता और ई-साक्ष्य की अवधारणा पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया। कार्यक्रम में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश, दुर्ग द्वारा स्वागत भाषण दिया गया, जिसमें निरंतर न्यायिक शिक्षा और विचारों के आदान-प्रदान के महत्व पर बल दिया गया। छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी के निदेशक द्वारा सेमीनार के उद्देश्यों की रूपरेखा प्रस्तुत की गई तथा बदलते कानूनी परिदृश्य में क्षमता निर्माण की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया। द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, दुर्ग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। 

सेमीनार के दौरान "मध्यस्थता 2.0 IAISAGR - दुर्ग के लिए मध्यस्थता रणनीति मॉडल" नामक प्रकाशन का विमोचन भी किया गया, जिसका अनावरण मुख्य अतिथि द्वारा किया गया। इस अवसर पर मध्यस्थता को लेकर न्यायपालिका की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया। सेमीनार में विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर प्रस्तुतिकरण भी दिए गए, जिनमें सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 10 एवं 11, न्यायालय की अधिकारिता, वादपत्र निरस्तीकरण की शक्ति, निष्पादन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की रणनीतियाँ, परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के प्रकरणों के निपटारे हेतु उपाय, धारा 351 बीएनएसएस के अंतर्गत अभियुक्त के परीक्षण, तथा ई-साक्ष्य एवं धारा 63 के प्रावधान शामिल रहे। नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु आयोजित रिफ्रेशर कोर्स में जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश, चतुर्थ एफटीएससी (पॉक्सो), दुर्ग द्वारा भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई, जबकि व्यवहार न्यायाधीश, कनिष्ठ श्रेणी, धमधा द्वारा भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्री के अधिकारीगण तथा दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कवर्धा एवं राजनांदगांव जिलों के न्यायिक अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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